सूरह Ar-Rum, आयत 7

30:7

يَعۡلَمُونَ ظَٰهِرٗا مِّنَ ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَهُمۡ عَنِ ٱلۡأٓخِرَةِ هُمۡ غَٰفِلُونَ ٧

वे केवल दुनिया के जीवन के कुछ बाहरी स्वरूप2 को जानते हैं, और वे आख़िरत से बिलकुल गाफ़िल हैं।

फ़ुटनोट

2 अर्थात सुख-सुविधा और आनंद को। और वे इससे अचेत हैं कि एक और जीवन भी है जिसमें कर्मों के परिणाम सामने आएँगे। बल्कि यही देखा जाता है कि कभी एक जाति उन्नति कर लेने के पश्चात् असफल हो जाती है।

तफ़सीर

वे ईमान और शरीयत के नियमों से अनभिज्ञ हैं। वे केवल सांसारिक जीवन के कुछ बाहरी स्वरूप को जानते हैं, जो जीविका कमाने और भौतिक सभ्यता के निर्माण से संबंधित है। जबकि वे आख़िरत से, जो वास्तविक जीवन का घर है, मुँह फेरे हुए हैं, उसपर कोई ध्यान नहीं देते हैं।