۞ ٱللَّهُ ٱلَّذِي خَلَقَكُم مِّن ضَعۡفٖ ثُمَّ جَعَلَ مِنۢ بَعۡدِ ضَعۡفٖ قُوَّةٗ ثُمَّ جَعَلَ مِنۢ بَعۡدِ قُوَّةٖ ضَعۡفٗا وَشَيۡبَةٗۚ يَخۡلُقُ مَا يَشَآءُۚ وَهُوَ ٱلۡعَلِيمُ ٱلۡقَدِيرُ ٥٤
अल्लाह वह है, जिसने तुम्हें कमज़ोरी (की स्थिति) से पैदा, फिर (बचपन की) कमज़ोरी के बाद शक्ति प्रदान की, फिर शक्ति के बाद कमज़ोरी और बुढ़ापा20 बना दिया। वह जो चाहता है, पैदा करता है। और वही सब कुछ जानने वाला, हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
फ़ुटनोट
20 अर्थात एक व्यक्ति जन्म से मरण तक अल्लाह के सामर्थ्य के अधीन रहता है, फिर उसकी उपासना में उसके अधीन होने और उसके पुनः पैदा कर देने के सामर्थ्य को अस्वीकार क्यों करते है?
तफ़सीर
अल्लाह वह है, जिसने (ऐ लोगो!) तुम्हें एक तुच्छ पानी (नुत्फ़े) से पैदा किया। फिर उसने तुम्हारी बचपन की कमज़ोरी के बाद जवानी की शक्ति बनाई, फिर जवानी की शक्ति के बाद पुढ़ापे की कमज़ोरी बनाई। अल्लाह जो भी कमज़ोरी और शक्ति चाहता है, पैदा करता है। और वह हर चीज़ को जानता है, उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है। वह सर्वशक्तिमान है, जिसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती।