وَلَمۡ يَكُن لَّهُم مِّن شُرَكَآئِهِمۡ شُفَعَٰٓؤُاْ وَكَانُواْ بِشُرَكَآئِهِمۡ كَٰفِرِينَ ١٣
और उनके लिए उनके साझियों में से कोई सिफ़ारिश करने वाले नहीं होंगे और वे अपने साझियों का इनकार करने वाले6 होंगे।
फ़ुटनोट
6 क्योंकि वे देख लेंगे कि उन्हें सिफ़ारिश करने का कोई अधिकार नहीं होगा। (देखिए : सूरतुल अन्आम, आयत : 23)
तफ़सीर
और उनके लिए उनके साझियों में से (जिनकी वे दुनिया में पूजा करते थे) उन्हें यातना से बचाने के लिए सिफ़ारिश करने वाले नहीं होंगे। और वे अपने साझियों का इनकार कर बैठेंगे। क्योंकि उन्होंने ज़रूरत पड़ने पर उन्हें छोड़ दिया। इसलिए कि वे सभी तबाही में बराबर हैं।