أَيۡنَمَا تَكُونُواْ يُدۡرِككُّمُ ٱلۡمَوۡتُ وَلَوۡ كُنتُمۡ فِي بُرُوجٖ مُّشَيَّدَةٖۗ وَإِن تُصِبۡهُمۡ حَسَنَةٞ يَقُولُواْ هَٰذِهِۦ مِنۡ عِندِ ٱللَّهِۖ وَإِن تُصِبۡهُمۡ سَيِّئَةٞ يَقُولُواْ هَٰذِهِۦ مِنۡ عِندِكَۚ قُلۡ كُلّٞ مِّنۡ عِندِ ٱللَّهِۖ فَمَالِ هَٰٓؤُلَآءِ ٱلۡقَوۡمِ لَا يَكَادُونَ يَفۡقَهُونَ حَدِيثٗا ٧٨
तुम जहाँ भी रहो, तुम्हें मौत आ पकड़ेगी, यद्यपि मज़बूत दुर्गों में क्यों न रहो। तथा उन्हें यदि कोई भलाई पहुँचती है, तो कहते हैं कि यह अल्लाह की ओर से है और यदि कोई बुराई पहुँचती है, तो कहते हैं कि यह आपके कारण है। (ऐ नबी!) उनसे कह दें कि सब अल्लाह की ओर से है। इन लोगों को क्या हो गया है कि कोई बात समझने के क़रीब ही नहीं54 आते?!
फ़ुटनोट
54 भावार्थ यह है कि जब मुसलमानों को कोई हानि हो जाती, तो मुनाफ़िक़ तथा यहूदी कहते : यह सब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के कारण हुआ। क़ुरआन कहता है कि सब कुछ अल्लाह की ओर से होता है। अर्थात उसने प्रत्येक दशा तथा परिणाम के लिए कुछ नियम बना दिए हैं। और जो कुछ भी होता है, वह उन्हीं दशाओं का परिणाम होता है। अतः तुम्हारी ये बातें जो कह रहे हो, बड़ी अज्ञानता की बातें हैं।
तफ़सीर
तुम जहाँ कहीं भी हो, तुम्हारा समय आने पर मृत्यु तुमको पा लेगी, भले ही तुम युद्ध के मैदान से दूर अभेद्य महलों में हो। इन मुनाफ़िक़ों (पाखंडियों) का हाल यह है कि यदि इन्हें संतान और ढेर सारी आजीविका जैसी कोई खुशी की चीज़ मिलती है, तो कहते हैं कि यह अल्लाह की ओर से है। लेकिन यदि इन्हें संतान या आजीविका में कठोर स्थिति का सामना होता है, तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से अपशकुन लेते हैं और कहते हैं कि यह बुराई आपके कारण है। (ऐ रसूल!) इनका खंडन करते हुए कह दें : भलाइयाँ और बुराइयाँ, सब अल्लाह के फ़ैसले और उसकी तक़दीर के अधीन हैं। तो इस तरह की बात कहने वालों को क्या हो गया है कि वे समझ ही नहीं पा रहे हैं कि आप उनसे क्या कह रहे हैं?!