أَمۡ يَحۡسُدُونَ ٱلنَّاسَ عَلَىٰ مَآ ءَاتَىٰهُمُ ٱللَّهُ مِن فَضۡلِهِۦۖ فَقَدۡ ءَاتَيۡنَآ ءَالَ إِبۡرَٰهِيمَ ٱلۡكِتَٰبَ وَٱلۡحِكۡمَةَ وَءَاتَيۡنَٰهُم مُّلۡكًا عَظِيمٗا ٥٤
बल्कि वे लोगों से43 उस पर ईर्ष्या करते हैं जो अल्लाह ने उन्हें अपने अनुग्रह से प्रदान किया है। तो हमने (पहले भी) इबराहीम के वंशज को पुस्तक तथा ह़िकमत दी है और हमने उन्हें विशाल राज्य प्रदान किया है।
फ़ुटनोट
43 अर्थात मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और मुसलमानों से इस बात पर ईर्ष्या करते हैं कि अल्लाह ने आप को नबी बना दिया तथा मुसलमानों को ईमान दे दिया।
तफ़सीर
बल्कि वे मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आपके साथियों से इस बिना पर ईर्ष्या करते हैं कि अल्लाह ने उन्हें, नुबुव्वत (ईश्दूतत्व), ईमान और धरती में सत्ता प्रदान किया है। तो ये लोग उनसे ईर्ष्या क्यों करते हैं, जबकि हमने इससे पहले भी इबराहीम अलैहिस्सलाम के वंशज को आसमानी किताब प्रदान किया और किताब के अलावा भी उनकी ओर वह्य की, तथा उन्हें लोगों पर विशाल राज्य प्रदान किया!?