وَلَأُضِلَّنَّهُمۡ وَلَأُمَنِّيَنَّهُمۡ وَلَأٓمُرَنَّهُمۡ فَلَيُبَتِّكُنَّ ءَاذَانَ ٱلۡأَنۡعَٰمِ وَلَأٓمُرَنَّهُمۡ فَلَيُغَيِّرُنَّ خَلۡقَ ٱللَّهِۚ وَمَن يَتَّخِذِ ٱلشَّيۡطَٰنَ وَلِيّٗا مِّن دُونِ ٱللَّهِ فَقَدۡ خَسِرَ خُسۡرَانٗا مُّبِينٗا ١١٩
और मैं उन्हें अवश्य पथभ्रष्ट करूँगा, और उन्हें अवश्य आशाएँ दिलाऊँगा और उन्हें अवश्य आदेश दूँगा तो वे पशुओं के कान चीरेंगे तथा निश्चय उन्हें आदेश दूँगा, तो वे अवश्य अल्लाह की रचना में परिवर्तन80 करेंगे। तथा जो अल्लाह को छोड़कर शैतान को अपना मित्र बना ले, वह निश्चय खुले घाटे में पड़ गया।
फ़ुटनोट
80 इसके बहुत से अर्थ हो सकते हैं। जैसे गोदना, गुदवाना, स्त्री का पुरुष का आचरण और स्वभाव बनाना, इसी प्रकार पुरुष का स्त्री का आचरण तथा रूप धारण करना आदि।
तफ़सीर
मैं उन्हें ज़रूर तेरे सीधे मार्ग से रोकूँगा, उन्हें अवश्य उनकी गुमराही को सजाने वाले झूठे वादों के साथ उम्मीदें दिलाऊँगा। अल्लाह के हलाल किए हुए जानवरों को हराम करने के लिए, उन्हें जानवरों के कान काटने का आदेश दूँगा। तथा उन्हें अल्लाह की रचना और उसकी प्रकृति को बदलने के लिए भी ज़रूर आदेश दूँगा। तथा जो शैतान को अपना सहायक व दोस्त बनाकर, उससे दोस्ती निभाता और उसकी आज्ञा का पालन करता है, तो वह धिक्कारित शैतान से वफादारी करके एक स्पष्ट नुक़सान में पड़ गया।