وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَآ إِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمۡ صَٰلِحًا أَنِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ فَإِذَا هُمۡ فَرِيقَانِ يَخۡتَصِمُونَ ٤٥
और निःसंदेह हमने समूद की ओर उनके भाई सालेह़ को भेजा कि तुम सब अल्लाह की इबादत करो, तो अचानक वे दो समूहों में बंटकर झगड़ने लगे।
तफ़सीर
हमने समूद जाति की ओर उनके नसबी भाई सालेह अलैहिस्सलाम को भेजा कि तुम केवल एकमात्र अल्लाह की इबादत करो। परंतु उनके निमंत्रण के बाद वे दो समूह बन गए : एक ईमान लाने वाला समूह और दूसरा काफिर समूह, वे इस बात पर झगड़ने लगे कि उनमें से कौन सत्य पर है।