لِيَكۡفُرُواْ بِمَآ ءَاتَيۡنَٰهُمۡۚ فَتَمَتَّعُواْ فَسَوۡفَ تَعۡلَمُونَ ٥٥
ताकि हमने उन्हें, जो कुछ प्रदान किया है, उसकी नाशुक्री करें। तो तुम (कुछ दिन) लाभ उठा लो। फिर तुम जल्द ही जान लोगे।
तफ़सीर
अल्लाह के साथ साझी ठहराने के कारण वे अपने ऊपर अल्लाह की नेमतों - जिनमें कष्ट दूर करना भी शामिल है - की नाशुक्री करने लगे। इसीलिए उनसे कहा गया : तुम जिन नेमतों में हो उनसे थोड़ा लाभ उठा लो, यहाँ तक कि अल्लाह का तत्काल और विलंबित अज़ाब आ जाए।