सूरह An-Nahl, आयत 126

16:126

وَإِنۡ عَاقَبۡتُمۡ فَعَاقِبُواْ بِمِثۡلِ مَا عُوقِبۡتُم بِهِۦۖ وَلَئِن صَبَرۡتُمۡ لَهُوَ خَيۡرٞ لِّلصَّٰبِرِينَ ١٢٦

और यदि तुम बदला लो, तो उतना ही बदला लो जितना तुम्हें कष्ट पहुँचाया गया है। और निःसंदेह यदि तुम सब्र करो तो निश्चय वह सब्र करने वालों के लिए बेहतर है।

तफ़सीर

और यदि तुम अपने दुश्मन से बदला लेना चाहो, तो उसे उतनी ही सज़ा दो जितना तुम्हें कष्ट पहुँचाया गया है, उससे अधिक नहीं। और अगर बदला लेने की शक्ति के बावजूद तुम उसे सज़ा देने के बजाय सब्र से काम लो, तो ऐसा करना तुममें से सब्र करने वालों के लिए, उन्हें सज़ा देकर बदला लेने से बेहतर है।