وَفُتِحَتِ ٱلسَّمَآءُ فَكَانَتۡ أَبۡوَٰبٗا ١٩
और आकाश खोल दिया जाएगा, तो उसमें द्वार ही द्वार हो जाएँगे।
तफ़सीर
और आकाश को खोल दिया जाएगा, तो उसमें खुले दरवाज़ों की तरह छेद और दरारें हो जाएँगी।
وَفُتِحَتِ ٱلسَّمَآءُ فَكَانَتۡ أَبۡوَٰبٗا ١٩
और आकाश खोल दिया जाएगा, तो उसमें द्वार ही द्वार हो जाएँगे।
और आकाश को खोल दिया जाएगा, तो उसमें खुले दरवाज़ों की तरह छेद और दरारें हो जाएँगी।