وَسُيِّرَتِ ٱلۡجِبَالُ فَكَانَتۡ سَرَابًا ٢٠
और पर्वत चलाए जाएँगे, तो वे मरीचिका बन जाएँगे।3
फ़ुटनोट
3 (17-20) इन आयतों में बताया जा रहा है कि निर्णय का दिन अपने निश्चित समय पर आकर रहेगा, उस दिन आकाश तथा धरती में एक बड़ी उथल-पुथल होगी। इसके लिए सूर में एक फूँक मारने की देर है। फिर जिसकी सूचना दी जा रही है तुम्हारे सामने आ जाएगी। तुम्हारे मानने या न मानने का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। और सब अपना ह़िसाब देने के लिए अल्लाह के न्यायालय की ओर चल पड़ेंगे।
तफ़सीर
और पहाड़ों को चलाया जाएगा, यहाँ तक कि वे बिखरे हुए धूल में बदल जाएँगे और मरीचिका की तरह हो जाएँगे।