सूरह Al-Qasas, आयत 19

28:19

فَلَمَّآ أَنۡ أَرَادَ أَن يَبۡطِشَ بِٱلَّذِي هُوَ عَدُوّٞ لَّهُمَا قَالَ يَٰمُوسَىٰٓ أَتُرِيدُ أَن تَقۡتُلَنِي كَمَا قَتَلۡتَ نَفۡسَۢا بِٱلۡأَمۡسِۖ إِن تُرِيدُ إِلَّآ أَن تَكُونَ جَبَّارٗا فِي ٱلۡأَرۡضِ وَمَا تُرِيدُ أَن تَكُونَ مِنَ ٱلۡمُصۡلِحِينَ ١٩

फिर जब उस (मूसा) ने उसे पकड़ना चाहा, जो उन दोनों का शत्रु था, तो उस (इसराईली) ने कहा : ऐ मूसा! क्या तू मुझे मारना चाहता है, जैसे तूने कल एक व्यक्ति को मार डाला था? तू केवल यही चाहता है कि धरती में शक्तिशाली बन जाए और तू नहीं चाहता कि सुधार करने वालों में से हो।

तफ़सीर

फिर जब मूसा अलैहिस्सलाम ने क़िब्ती को पकड़ना चाहा, जो उनका तथा उस इसराईली का शत्रु था, तो इसराईली ने सोचा कि मूसा उसे पकड़ना चाहते हैं क्योंकि उसने उन्हें यह कहते हुए सुना था कि : "निश्चय तू खुला गुमराह है।", इसलिए उसने मूसा से कहा : क्या तुम मुझे भी मार डालना चाहते हो, जैसे तुमने कल एक व्यक्ति को मार डाला था? तुम तो केवल यह चाहते हो कि धरती पर अत्याचारी बन जाओ, लोगों को मारो और उनपर अत्याचार करो। तुम झगड़ने वाले लोगों के बीच सुलह कराने वालों में से नहीं होना चाहते हो।