وَدَخَلَ ٱلۡمَدِينَةَ عَلَىٰ حِينِ غَفۡلَةٖ مِّنۡ أَهۡلِهَا فَوَجَدَ فِيهَا رَجُلَيۡنِ يَقۡتَتِلَانِ هَٰذَا مِن شِيعَتِهِۦ وَهَٰذَا مِنۡ عَدُوِّهِۦۖ فَٱسۡتَغَٰثَهُ ٱلَّذِي مِن شِيعَتِهِۦ عَلَى ٱلَّذِي مِنۡ عَدُوِّهِۦ فَوَكَزَهُۥ مُوسَىٰ فَقَضَىٰ عَلَيۡهِۖ قَالَ هَٰذَا مِنۡ عَمَلِ ٱلشَّيۡطَٰنِۖ إِنَّهُۥ عَدُوّٞ مُّضِلّٞ مُّبِينٞ ١٥
और वह नगर में उसके लोगों की कुछ असावधानी के समय में प्रवेश किया, तो उसमें दो व्यक्तियों को लड़ते हुए पाया। यह उसके गिरोह में से है और यह उसके शत्रुओं में से।6 तो जो उसके गिरोह में से था, उसने उसके विरुद्ध उससे मदद माँगी, जो उसके शत्रुओं में से था। तो मूसा ने उसे घूँसा मारा तो उसका काम तमाम कर दिया। (मूसा ने) कहा : यह शैतान के काम से है, निश्चित रूप से वह खुले तौर पर गुमराह करने वाला दुश्मन है।
फ़ुटनोट
6 अर्थात एक इसराईली तथा दूसरा क़िब्ती फ़िरऔन की जाति से था।
तफ़सीर
(एक दिन) मूसा अलैहिस्सलाम उस समय नगर में आए, जब लोग अपने घरों में विश्राम कर रहे थे। उन्होंने वहाँ दो आदमियों को वाद-विवाद करते और आपस में झगड़ते हुए पाया। उनमें से एक मूसा अलैहिस्सलाम की जाति बनी इसराईल से और दूसरा क़िब्तियों में से अर्थात् मूसा के दुश्मन फिरऔन की जाति से था। अतः जो व्यक्ति उनकी जाति से था, उसने मूसा से अपने शत्रु क़िब्ती के विरुद्ध सहायता की गुहार लगाई। चुनाँचे मूसा ने क़िब्ती को एक घूँसा मारा, जिसकी ताक़त से वह तुरंत मर गया। यह देखकर मूसा अलैहिस्सलाम ने कहा : यह शैतान के (गलत कार्यों को) सुंदर बनाकर पेश करने और उसके प्रलोभन से है। निःसंदेह शैतान एक दुश्मन है जो अपने पीछे चलने वालों को गुमराह करने वाला है, जिसकी दुश्मनी स्पष्ट है। अतः जो कुछ मुझसे हुआ, वह उसकी दुश्मनी के कारण हुआ, और इस कारण कि वह एक गुमराह करने वाला है, जो मुझे गुमराह करना चाहता है।