يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَتَوَلَّوۡاْ قَوۡمًا غَضِبَ ٱللَّهُ عَلَيۡهِمۡ قَدۡ يَئِسُواْ مِنَ ٱلۡأٓخِرَةِ كَمَا يَئِسَ ٱلۡكُفَّارُ مِنۡ أَصۡحَٰبِ ٱلۡقُبُورِ ١٣
ऐ ईमान वालो! तुम उन लोगों को मित्र न बनाओ, जिनपर अल्लाह क्रोधित हुआ है। निश्चय वे आख़िरत10 से वैसे ही निराश हो चुके हैं, जैसे काफ़िर लोग क़ब्र वालों (के जीवित होने) से निराश हो चुके हैं।
फ़ुटनोट
10 आख़िरत से निराश होने का अर्थ उसका इनकार है, जैसे उन्हें मरने के पश्चात् जीवन का इनकार है।
तफ़सीर
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! ऐसे लोगों से मित्रता न रखो, जिनपर अल्लाह क्रोधित हुआ है, जो क़ियामत के दिन पर विश्वास नहीं रखते, बल्कि वे उससे उसी तरह निराश हैं, जैसे मरणोपरांत पुनर्जीवन के इनकार के कारण अपने मरे हुए लोगों के लौटने से निराश हैं।