فَتَقَطَّعُوٓاْ أَمۡرَهُم بَيۡنَهُمۡ زُبُرٗاۖ كُلُّ حِزۡبِۭ بِمَا لَدَيۡهِمۡ فَرِحُونَ ٥٣
फिर वे अपने मामले (धर्म) में परस्पर कई समूहों में विभाजित होकर टुकड़े-टुकड़े हो गए। प्रत्येक समूह के लोग उसी पर खुश हैं, जो उनके पास14 है।
फ़ुटनोट
14 इन आयतों में कहा गया है कि सब रसूलों ने यही शिक्षा दी है कि स्वच्छ पवित्र चीज़ें खाओ और सत्कर्म करो। तुम्हारा पालनहार एक है और तुम सभी का धर्म एक है। परंतु लोगों ने धर्म में विभेद करके बहुत से संप्रदाय बना लिए, और अब प्रत्येक संप्रदाय अपने विश्वास तथा कर्म में मग्न है, भले ही वह सत्य से दूर हो।
तफ़सीर
फिर उनके बाद, उनके अनुयायी धर्म में बिखराव का शिकार होकर, कई समूहों और दलों में विभाजित हो गए। हर दल उसी पर खुश है, जिसे वह यह मानता है कि वही अल्लाह के निकट पसंदीदा धर्म है, तथा जो कुछ उसके अलावा के पास है, उसपर ध्यान नहीं देता है।