सूरह Al-Mujadilah, आयत 14

58:14

۞ أَلَمۡ تَرَ إِلَى ٱلَّذِينَ تَوَلَّوۡاْ قَوۡمًا غَضِبَ ٱللَّهُ عَلَيۡهِم مَّا هُم مِّنكُمۡ وَلَا مِنۡهُمۡ وَيَحۡلِفُونَ عَلَى ٱلۡكَذِبِ وَهُمۡ يَعۡلَمُونَ ١٤

क्या आपने उन लोगों को नहीं देखा10, जिन्होंने उस समुदाय को मित्र बना लिया, जिसपर अल्लाह क्रोधित हुआ? वे न तुममें से हैं और न उनमें से। और वे जान-बूझकर झूठी बात पर क़समें खाते हैं।

फ़ुटनोट

10 इससे संकेत मुनाफ़िक़ों की ओर है जिन्होंने यहूदियों को अपना मित्र बना रखा था।

तफ़सीर

क्या (ऐ रसूल) आपने उन मुनाफ़िक़ो (पाखंडियों) को नहीं देखा, जिन्होंने उन यहूदियों को मित्र बना लिया, जिनपर उनके कुफ़्र और पापों के कारण अल्लाह क्रोधित हुआ? ये मुनाफ़िक़ न तो मोमिनों में से हैं और न यहूदियों में से। बल्कि वे दुविधा में पड़े हुए हैं, न इधर के हैं, न उधर के। तथा वे क़समें खाते हैं कि वे मुसलमान हैं, और उन्होंने मुसलमानों की सूचनाएँ यहूदियों को नहीं पहुँचाई हैं। जबकि वे अपनी क़सम में झूठे हैं।