يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تُحَرِّمُواْ طَيِّبَٰتِ مَآ أَحَلَّ ٱللَّهُ لَكُمۡ وَلَا تَعۡتَدُوٓاْۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ ٱلۡمُعۡتَدِينَ ٨٧
ऐ ईमान वालो! उन स्वच्छ पवित्र चीज़ों को, जो अल्लाह ने तुम्हारे लिए हलाल (वैध) की हैं, हराम (अवैध)55 न ठहराओ और सीमा से आगे न बढ़ो। निःसंदेह अल्लाह हद से आगे बढ़ने वालों56 से प्रेम नहीं करता।
फ़ुटनोट
55 अर्थात किसी भी खाद्य अथवा वस्तु को वैध अथवा अवैध करने का अधिकार केवल अल्लाह को है।
56 यहाँ से फिर आदेशों तथा निषेधों का वर्णन किया जा रहा है। अन्य धर्मों के अनुयायियों ने संन्यास को अल्लाह के सामीप्य का साधन समझ लिया था, और ईसाइयों ने संन्यास की रीति बना ली थी और अपने ऊपर सांसारिक उचित स्वाद तथा सुख को अवैध कर लिया था। इस लिए यहाँ सावधान किया जा रहा है कि यह कोई अच्छाई नहीं, बल्कि धर्म सीमा का उल्लंघन है।
तफ़सीर
ऐ ईमान वालो! खाने, पीने और महिलाओं में से आनंददायक वैध चीज़ों को हराम न ठहराओ, उन्हें ज़ुह्द (दुनिया से अरूचि) या उपासना के रूप में निषिद्ध मत करो, तथा उसकी सीमा से आगे न बढ़ो, जो अल्लाह ने तुमपर हराम किया है। निःसंदेह अल्लाह उन लोगों से प्यार नहीं करता, जो उसकी सीमाओं का उल्लंघन करते हैं, बल्कि वह उनसे नफ़रत करता है।