सूरह Al-Ma'idah, आयत 7

5:7

وَٱذۡكُرُواْ نِعۡمَةَ ٱللَّهِ عَلَيۡكُمۡ وَمِيثَٰقَهُ ٱلَّذِي وَاثَقَكُم بِهِۦٓ إِذۡ قُلۡتُمۡ سَمِعۡنَا وَأَطَعۡنَاۖ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمُۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ ٧

तथा अपने ऊपर अल्लाह की नेमत याद करो और उसका वह वचन जो उसने तुमसे दृढ़ रूप से लिया है, जब तुमने कहा था : "हमने सुना और हमने मान लिया" तथा अल्लाह से डरो। निःसंदेह अल्लाह सीनों की बात को भली-भाँति जानने वाला है।

तफ़सीर

तथा अपने ऊपर अल्लाह के इस अनुग्रह को याद करो कि उसने तुम्हें इस्लाम का मार्गदर्शन प्रदान किया, और उसकी उस प्रतिज्ञा को याद करो, जो उसने तुमसे उस समय ली थी, जब तुमने नबी सल्लल्लाहू अलैहि व सल्लम से सुखद और अप्रिय चीज़ों में बात सुनने और मानने की बैअत करते हुए कहा था : 'हमने आपकी बात सुनी और हमने आपका आदेश मान लिया'। तथा अल्लाह के आदेशों (जिनमें उसके वचन भी हैं) का पालन करके तथा उसकी मना की हुई बातों से बचकर, उससे डरो। निश्चय अल्लाह जो कुछ दिलों में है उसे ख़ूब जानने वाला है, अतः उससे कोई भी चीज़ छिपी नहीं है।