أَفَحُكۡمَ ٱلۡجَٰهِلِيَّةِ يَبۡغُونَۚ وَمَنۡ أَحۡسَنُ مِنَ ٱللَّهِ حُكۡمٗا لِّقَوۡمٖ يُوقِنُونَ ٥٠
फिर क्या वे जाहिलिय्यत (पूर्व-इस्लामिक काल) का फ़ैसला चाहते हैं? और अल्लाह से बेहतर फ़ैसला करने वाला कौन है, उन लोगों के लिए जो विश्वास रखते हैं?
तफ़सीर
क्या वे आपके फ़ैसले को छोड़कर मूर्तिपूजा करने वाले जाहिलिय्यत (पूर्व-इस्लामिक काल) के लोगों का फ़ैसला चाहते हैं, जो अपनी इच्छाओं के अनुसार फ़ैसला करते हैं?! विश्वास रखने वालों के निकट, जो अल्लाह के बारे में उस चीज़ को समझते हैं जो उसने अपने रसूल पर उतारी है, अल्लाह से बेहतर फ़ैसला करने वाला कोई नहीं है। न कि अज्ञानता और इच्छाओं के पीछे चलने वाले लोग, जो केवल वही स्वीकार करते हैं जो उनकी इच्छाओं से मेल खाता है, भले ही वह ग़लत हो।