وَأَمَّا ٱلۡجِدَارُ فَكَانَ لِغُلَٰمَيۡنِ يَتِيمَيۡنِ فِي ٱلۡمَدِينَةِ وَكَانَ تَحۡتَهُۥ كَنزٞ لَّهُمَا وَكَانَ أَبُوهُمَا صَٰلِحٗا فَأَرَادَ رَبُّكَ أَن يَبۡلُغَآ أَشُدَّهُمَا وَيَسۡتَخۡرِجَا كَنزَهُمَا رَحۡمَةٗ مِّن رَّبِّكَۚ وَمَا فَعَلۡتُهُۥ عَنۡ أَمۡرِيۚ ذَٰلِكَ تَأۡوِيلُ مَا لَمۡ تَسۡطِع عَّلَيۡهِ صَبۡرٗا ٨٢
और रही दीवार, तो वह शहर के दो अनाथ लड़कों की थी और उसके नीचे उन दोनों के लिए एक खज़ाना था और उनके पिता नेक थे। तो तेरे पालनहार ने चाहा कि वे दोनों अपनी जवानी को पहुँच जाएँ और अपना खज़ाना निकाल लें, तेरे पालनहार की ओर से दया स्वरूप। और मैंने यह अपनी मर्जी से नहीं किया।28 यह है उन बातों का असली सच जिनपर तुम धैर्य न रख सके।
फ़ुटनोट
28 ये सभी कार्य, विशेष रूप से निर्दोष बालक का वध धार्मिक नियम से उचित न था। इसलिए मूसा (अलैहिस्सलाम) इसको सहन न कर सके। किंतु ख़ज़िर को विशेष ज्ञान दिया गया था जो मूसा (अलैहिस्सलाम) के पास नहीं था। इस प्रकार अल्लाह ने जता दिया कि हर ज्ञानी के ऊपर भी कोई ज्ञानी है।
तफ़सीर
और रही बात उस दीवार की, जिसकी मैंने मरम्मत की थी तथा आपने उसकी मरम्मत करने पर मेरा विरोध किया था, वह उस नगर के दो बालकों की थी, जिसमें हम आए थे : उनके पिता की मृत्यु हो चुकी थी और दीवार के नीचे उन दोनों के लिए धन गाड़ा हुआ था और इन दोनों बालकों का पिता नेक था। इसलिए (हे मूसा!) आपके पालनहार ने चाहा कि वे दोनों वयस्कता तक पहुँचें और बड़े हो जाएँ और दीवार के नीचे से अपने गड़े हुए धन को निकालें; क्योंकि यदि दीवार अभी गिर जाती, तो उनका धन प्रकट हो जाता और क्षति से ग्रस्त हो जाता। दरअसल, यह उपाय आपके पालनहार की ओर से उन दोनों पर एक दया थी। मैंने इसे अपने विवेक से नहीं किया था। यह है असल वास्तविकता उन घटनाओं की, जिनपर आप धैर्य नहीं रख सके।