सूरह Al-Jathiyah, आयत 12

45:12

۞ ٱللَّهُ ٱلَّذِي سَخَّرَ لَكُمُ ٱلۡبَحۡرَ لِتَجۡرِيَ ٱلۡفُلۡكُ فِيهِ بِأَمۡرِهِۦ وَلِتَبۡتَغُواْ مِن فَضۡلِهِۦ وَلَعَلَّكُمۡ تَشۡكُرُونَ ١٢

वह अल्लाह ही है जिसने तुम्हारे लिए समुद्र को वश में कर दिया, ताकि जहाज़ उसमें उसके आदेश से चलें, और ताकि तुम उसके अनुग्रह में से कुछ खोज सको, और ताकि तुम आभार प्रकट करो।

तफ़सीर

अकेला अल्लाह ही है, जिसने (ऐ लोगो!) तुम्हारे लिए समुद्र को वशीभूत कर दिया, ताकि उसके आदेश से उसमें नौकाएँ चलें, और ताकि तुम विभिन्न प्रकार की वैध कमाइयों के द्वारा उसका अनुग्रह तलाश करो और ताकि तुम अपने ऊपर अल्लाह की नेमतों के प्रति आभार प्रकट करो।