सूरह Al-Isra, आयत 59

17:59

وَمَا مَنَعَنَآ أَن نُّرۡسِلَ بِٱلۡأٓيَٰتِ إِلَّآ أَن كَذَّبَ بِهَا ٱلۡأَوَّلُونَۚ وَءَاتَيۡنَا ثَمُودَ ٱلنَّاقَةَ مُبۡصِرَةٗ فَظَلَمُواْ بِهَاۚ وَمَا نُرۡسِلُ بِٱلۡأٓيَٰتِ إِلَّا تَخۡوِيفٗا ٥٩

और हमें निशानियाँ भेजने से केवल इस बात ने रोका कि पिछले लोगों ने उन्हें झुठला35 दिया। और हमने समूद (समुदाय) को ऊँटनी का स्पष्ट चमत्कार दिया, तो उन्होंने उसपर अत्याचार किया। और हम निशानियाँ (चमत्कार) केवल डराने के लिए भेजते हैं।

फ़ुटनोट

35 अर्थात चमत्कार की माँग करने पर चमत्कार इसलिए नहीं भेजा जाता कि उसके पश्चात् न मानने पर यातना का आना अनिवार्य हो जाता है, जैसाकि भाष्यकारों ने लिखा है।

तफ़सीर

और हमने रसूल की सच्चाई को इंगित करने वाली संवेदी निशानियाँ, जिनकी माँग मुश्रिकों ने की थी, जैसे कि मृतकों को जीवित करना आदि, इसलिए उतारना छोड़ दिया, क्योंकि हमने उन्हें पिछले समुदायों पर उतारा था, परन्तु उन्होंने उन्हें झुठला दिया था। चुनाँचे हमने समूद समुदाय को एक महान और स्पष्ट निशानी ऊँटनी के रूप में दी थी। लेकिन उन्होंने उसका इनकार कर दिया। इसलिए हमने उन्हें जल्द ही यातना से ग्रस्त कर दिया। और हम रसूलों के हाथों निशानियाँ केवल उनके समुदायों को डराने के लिए भेजते हैं, ताकि वे इस्लाम ग्रहण कर लें।