فِيهِ ءَايَٰتُۢ بَيِّنَٰتٞ مَّقَامُ إِبۡرَٰهِيمَۖ وَمَن دَخَلَهُۥ كَانَ ءَامِنٗاۗ وَلِلَّهِ عَلَى ٱلنَّاسِ حِجُّ ٱلۡبَيۡتِ مَنِ ٱسۡتَطَاعَ إِلَيۡهِ سَبِيلٗاۚ وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَنِيٌّ عَنِ ٱلۡعَٰلَمِينَ ٩٧
उसमें खुली निशानियाँ हैं, (जिनमें) मक़ामे इबराहीम51 है, तथा जो उसमें प्रवेश कर गया, वह सुरक्षित हो गया। तथा अल्लाह के लिए लोगों पर इस घर का हज्ज अनिवार्य है, जो वहाँ तक पहुँचने का सामर्थ्य रखता हो, और जिसने इनकार किया तो निःसंदेह अल्लाह (उससे, बल्कि) समस्त संसार से निस्पृह (बेनियाज़) है।
फ़ुटनोट
51 अर्थात वह पत्थर जिसपर खड़े होकर इबराहीम (अलैहिस्सलाम) ने काबा का निर्माण किया, जिसपर उनके पैरों के निशान आज तक हैं।
तफ़सीर
इस घर के अंदर उसके सम्मान एवं प्रतिष्ठा की स्पष्ट निशानियाँ हैं, जैसे हज्ज के कार्य और उसके निर्धारित स्थान। इन निशानियों में से एक वह पत्थर भी है, जिसपर इबराहीम अलैहिस्सलाम उस समय खड़े हुए थे जब उन्होंने काबा की दीवार को उठाना चाहा था। तथा एक निशानी यह भी है कि जो इसमें प्रवेश कर जाए, उससे भय दूर हो जाएगा और उसे कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा। तथा अल्लाह के लिए लोगों पर हज्ज के अनुष्ठानों को पूरा करने के लिए इस घर को जाना अनिवार्य है। यह आदेश उनमें से उसके लिए है जो वहाँ तक पहुँचने में सक्षम है। और जिसने हज्ज के अनिवार्य होने का इनकार किया, तो (याद रखो कि) अल्लाह ऐसे काफ़िर से तथा समस्त संसार वालों से निस्पृह है।