إِذۡ قَالَتِ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ يَٰمَرۡيَمُ إِنَّ ٱللَّهَ يُبَشِّرُكِ بِكَلِمَةٖ مِّنۡهُ ٱسۡمُهُ ٱلۡمَسِيحُ عِيسَى ٱبۡنُ مَرۡيَمَ وَجِيهٗا فِي ٱلدُّنۡيَا وَٱلۡأٓخِرَةِ وَمِنَ ٱلۡمُقَرَّبِينَ ٤٥
(ऐ नबी! उस समय को याद करें) जब फ़रिश्तों ने कहा : ऐ मरयम! निःसंदेह अल्लाह तुम्हें अपनी ओर से एक शब्द21 की शुभ सूचना देता है, जिसका नाम 'मसीह़ ईसा बिन मरयम' है। वह दुनिया तथा आख़िरत में महान स्थान वाला और निकटवर्ती लोगों में से होगा।
फ़ुटनोट
21 अर्थात वह अल्लाह के शब्द "कुन" से पैदा होगा, जिस का अर्थ है "हो जा"।
तफ़सीर
(ऐ रसूल!) उस समय को याद करें, जब फ़रिश्तों ने कहा : ऐ मरयम! अल्लाह तुम्हें एक ऐसे लड़के की ख़ुशख़बरी देता है, जिसकी रचना बिना पिता के होगी। उसकी रचना अल्लाह के एक शब्द से होगी, इस प्रकार कि वह कहेगा : "कुन" (हो जा) तो वह अल्लाह की आज्ञा से एक पुत्र हो जाएगा। उस बच्चे का नाम : 'मसीह ईसा बिन मरयम' है। उसका दुनिया और आख़िरत में एक महान स्थान होगा और वह अल्लाह के निकटवर्तियों में से होगा।