सूरह Al-Imran, आयत 27

3:27

تُولِجُ ٱلَّيۡلَ فِي ٱلنَّهَارِ وَتُولِجُ ٱلنَّهَارَ فِي ٱلَّيۡلِۖ وَتُخۡرِجُ ٱلۡحَيَّ مِنَ ٱلۡمَيِّتِ وَتُخۡرِجُ ٱلۡمَيِّتَ مِنَ ٱلۡحَيِّۖ وَتَرۡزُقُ مَن تَشَآءُ بِغَيۡرِ حِسَابٖ ٢٧

तू रात को दिन में दाख़िल करता है तथा दिन को रात में दाख़िल12 करता है। और तू जीवित को मृत से निकालता है तथा मृत को जीवित से निकालता है और तू जिसे चाहे असंख्य जीविका देता है।

फ़ुटनोट

12 इसमें दिन-रात के परिवर्तन की ओर संकेत है।

तफ़सीर

तेरी शक्ति की निशानियों में से एक यह है कि तू रात को दिन में दाख़िल करता है, तो दिन का समय लंबा हो जाता है और तू दिन को रात में दाखिल करता है, तो रात का समय लंबा हो जाता है, तथा तू जीवित को मृत से निकालता है; जैसे मोमिन को काफ़िर से और खेती को दाने से। तथा तू मृत को जीवित से निकालता है; जैसे काफ़िर को मोमिन से और अंडे को मुर्गी से। और तू जिसे चाहे बिना हिसाब और गिनती के विस्तृत जीविका प्रदान करता है।