सूरह Al-Imran, आयत 111

3:111

لَن يَضُرُّوكُمۡ إِلَّآ أَذٗىۖ وَإِن يُقَٰتِلُوكُمۡ يُوَلُّوكُمُ ٱلۡأَدۡبَارَ ثُمَّ لَا يُنصَرُونَ ١١١

वे तुम्हें थोड़ा कष्ट पहुँचाने के सिवा कदापि कोई हानि नहीं पहुँचा सकेंगे और यदि वे तुमसे युद्ध करेंगे, तो तुम्हारे सामने पीठ फेरकर भाग खड़े होंगे। फिर उनकी कोई सहायता (भी) नहीं की जाएगी।

तफ़सीर

वे चाहे जितनी भी दुश्मनी कर लें, वे तुम्हें - ऐ ईमान वालो - तुम्हारे धर्म तथा तुम्हारी जानों के संबंध में कोई हानि नहीं पहुँचा सकते। वे केवल अपनी ज़बान से धर्म पर दोषारोपण करके तथा तुम्हारा मज़ाक उड़ाकर, तुम्हें कष्ट दे सकते हैं। यदि वे तुम्हारे साथ युद्ध करें, तो तुम्हारे सामने पराजित होकर भाग खड़े होंगे और तुम्हारे विरुद्ध उनकी कभी भी सहायता नहीं की जाएगी।