सूरह Al-Hashr, आयत 12

59:12

لَئِنۡ أُخۡرِجُواْ لَا يَخۡرُجُونَ مَعَهُمۡ وَلَئِن قُوتِلُواْ لَا يَنصُرُونَهُمۡ وَلَئِن نَّصَرُوهُمۡ لَيُوَلُّنَّ ٱلۡأَدۡبَٰرَ ثُمَّ لَا يُنصَرُونَ ١٢

निश्चय अगर वे निकाले गए तो ये उनके साथ नहीं निकलेंगे और निश्चय अगर उनसे युद्ध किया गया तो ये उनकी सहायता नहीं करेंगे और निश्चय अगर उनकी सहायता की भी तो अवश्य पीठ फेरकर भागेंगे, फिर उनकी सहायता नहीं की जाएगी।

तफ़सीर

अगर मुसलमानों ने यहूदियों को निकाल दिया, तो वे उनके साथ नहीं निकलेंगे। और अगर मुसलमानों ने उनसे युद्ध किया, तो वे उनकी सहायता और मदद नहीं करेंगे। और अगर उनकी मदद और सहायता करने के लिए निकले भी, तो उनसे पीठ फेरकर भाग खड़े होंगे। फिर इसके बाद मुनाफ़िक़ों की मदद नहीं की जाएगी, बल्कि अल्लाह उन्हें अपमानित और तिरस्कृत करेगा।