सूरह Al-Hajj, आयत 37

22:37

لَن يَنَالَ ٱللَّهَ لُحُومُهَا وَلَا دِمَآؤُهَا وَلَٰكِن يَنَالُهُ ٱلتَّقۡوَىٰ مِنكُمۡۚ كَذَٰلِكَ سَخَّرَهَا لَكُمۡ لِتُكَبِّرُواْ ٱللَّهَ عَلَىٰ مَا هَدَىٰكُمۡۗ وَبَشِّرِ ٱلۡمُحۡسِنِينَ ٣٧

अल्लाह को उनके मांस और उनके रक्त हरगिज़ नहीं पहुँचेंगे, परंतु उसे तुम्हारा तक़वा पहुँचेगा। इसी प्रकार, उस (अल्लाह) ने उन (पशुओं) को तुम्हारे वश में कर दिया है, ताकि तुम अल्लाह की महिमा का गान करो26, उस मार्गदर्शन पर, जो उसने तुम्हें दिया है। और (ऐ रसूल!) आप सत्कर्मियों को शुभ सूचना सुना दें।

फ़ुटनोट

26 ज़बह़ करते समय (बिस्मिल्लाहि, अल्लाहु अकबर) कहो।

तफ़सीर

तुम्हारे क़ुर्बानी किए हुए जानवरों का मांस या रक्त अल्लाह के पास हरगिज़ नहीं पहुँचेगा। और न हीं उन्हें उस तक पहुँचाया जाएगा। लेकिन उसके पास तुम्हारा उनके बारे में अल्लाह से डरना पहुँचाया जाएगा; इस प्रकार कि तुम उन्हें केवल अल्लाह की निकटता प्राप्त करने के लिए ज़बह करो। इसी तरह, अल्लाह ने उन्हें तुम्हारे वश में कर दिया है, ताकि तुम सत्य मार्ग दिखाने पर अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हुए उसकी महिमा का गान करो। और (ऐ रसूल!) उन लोगों को खुशख़बरी दे दें, जो अच्छी तरह अल्लाह की इबादत करते हैं और उसकी मख़लूक़ के साथ अच्छा व्यवहार करते हैं।