وَٱلۡبُدۡنَ جَعَلۡنَٰهَا لَكُم مِّن شَعَٰٓئِرِ ٱللَّهِ لَكُمۡ فِيهَا خَيۡرٞۖ فَٱذۡكُرُواْ ٱسۡمَ ٱللَّهِ عَلَيۡهَا صَوَآفَّۖ فَإِذَا وَجَبَتۡ جُنُوبُهَا فَكُلُواْ مِنۡهَا وَأَطۡعِمُواْ ٱلۡقَانِعَ وَٱلۡمُعۡتَرَّۚ كَذَٰلِكَ سَخَّرۡنَٰهَا لَكُمۡ لَعَلَّكُمۡ تَشۡكُرُونَ ٣٦
और क़ुर्बानी के ऊँटों को हमने तुम्हारे लिए अल्लाह की निशानियों में से बनाया है। तुम्हारे लिए उनमें भलाई है। अतः उनपर अल्लाह का नाम लो, इस हाल में कि घुटना बंधे खड़े हों। फिर जब उनके पहलू धरती से आ लगें25, तो उनमें से स्वयं खाओ तथा संतोष करने वाले निर्धन और माँगने वाले को भी खिलाओ। इसी प्रकार, हमने उन्हें तुम्हारे वश में कर दिया है, ताकि तुम कृतज्ञ बनो।
फ़ुटनोट
25 अर्थात उसका प्राण पूरी तरह़ निकल जाए।
तफ़सीर
हमने उन क़ुर्बानी के ऊँटों और गायों को, जिन्हें अल्लाह के घर की तरफ़ ले जाया जाता है, तुम्हारे लिए धर्म के अनुष्ठानों और प्रतीकों में से बनाया है। उनके अंदर तुम्हारे लिए धार्मिक और सांसारिक लाभ हैं। अतः उन्हें ज़बह करते समय (बिस्मिल्लाह) कहो, जबकि तीन टाँगों के बल खड़ा करके एक अगली टाँग बाँधी हुई हो, ताकि भाग न सकें। फिर जब ज़बह करने के बाद अपने पहलू के बल लेट जाएँ, तो (ऐ क़ुर्बानी करने वालो !) उनका मांस खुद खाओ और उस निर्धन को दो, जो माँगने से बचता है और उस निर्धन को भी दो, जो माँगता है। जिस तरह हमने उन्हें तुम्हारे वश में कर दिया है, ताकि तुम उनके ऊपर सामान लादो और उनकी सवारी करो, उसी तरह हमने उन्हें तुम्हारे वश में कर दिया है कि वहाँ तक चले जाते हैं, जहाँ तुम उन्हें अल्लाह की निकटता प्राप्त करने के लिए ज़बह करते हो। ताकि तुम उन्हें तुम्हारे वश में करने की इस नेमत पर अल्लाह का शुक्रिया अदा करो।