ذَٰلِكَۖ وَمَن يُعَظِّمۡ حُرُمَٰتِ ٱللَّهِ فَهُوَ خَيۡرٞ لَّهُۥ عِندَ رَبِّهِۦۗ وَأُحِلَّتۡ لَكُمُ ٱلۡأَنۡعَٰمُ إِلَّا مَا يُتۡلَىٰ عَلَيۡكُمۡۖ فَٱجۡتَنِبُواْ ٱلرِّجۡسَ مِنَ ٱلۡأَوۡثَٰنِ وَٱجۡتَنِبُواْ قَوۡلَ ٱلزُّورِ ٣٠
ये (हमारे आदेश) हैं। और जो कोई अल्लाह के निषेधों (मर्यादाओं) का सम्मान करे, तो यह उसके लिए, उसके पालनहार के पास बेहतर है। और तुम्हारे लिए चौपाए हलाल (वैध) कर दिए गए हैं, सिवाय उनके जो तुम्हें पढ़कर सुनाए जाते21 हैं। अतः मूर्तियों की गंदगी से बचो तथा झूठी बात से बचो।
फ़ुटनोट
21 (देखिए : सूरतुल माइदा, आयत : 3)
तफ़सीर
ये जो तुम्हें आदेश दिए गए हैं (जैसे सिर मुंडवाना, नाखून काटना और मैल-कुचैल दूर करना, मन्नत पूरी करना और का'बा का तवाफ़ करना), इन्हें अल्लाह ने तुमपर अनिवार्य किया है। अतः अल्लाह की अनिवार्य की हुई चीज़ों का सम्मान करो। और जो व्यक्ति अपने एहराम की स्थिति में उन चीज़ों से बचता है जिनसे बचने का अल्लाह ने उसे आदेश दिया है; अल्लाह की सीमाओं का सम्मान करते हुए उनका उल्लंघन करने और उसके निषेधों को हलाल ठहराने से बचता है, तो यह उसके लिए उसके रब के पास दुनिया एवं आख़िरत में बेहतर है। और (ऐ लोगो!) तुम्हारे लिए चौपायों अर्थात ऊँट, गाय और भेड़-बकरी को हलाल किया गया है। चुनाँचे उनमें से तुम्हारे लिए 'हामी', 'बहीरा' और 'वसीला' आदि जानवरों को हराम नहीं किया है। उनमें से केवल वही हराम किया है, जिनका वर्णन तुम क़ुरआन में पाते हो, जैसे मरे हुए जानवर और बहते रक्त आदि का हराम होना। इसलिए गंदगी अर्थात् मूर्तियों से बचो, और हर असत्य बात से बचो, जिसे अल्लाह या उसकी मख़लूक की ओर झूठे तौर पर मनसूब कर दिया गया हो।