सूरह Al-Furqan, आयत 42

25:42

إِن كَادَ لَيُضِلُّنَا عَنۡ ءَالِهَتِنَا لَوۡلَآ أَن صَبَرۡنَا عَلَيۡهَاۚ وَسَوۡفَ يَعۡلَمُونَ حِينَ يَرَوۡنَ ٱلۡعَذَابَ مَنۡ أَضَلُّ سَبِيلًا ٤٢

निःसंदेह यह तो क़रीब था कि हमें हमारे पूज्यों से भटका ही देता, यदि हम उनपर अडिग न रहते। और शीघ्र ही वे जान लेंगे, जब वे यातना देखेंगे, कि मार्ग से अधिक पथभ्रष्ट कौन है?

तफ़सीर

निश्चय यह हमें हमारे देवताओं की पूजा करने से दूर करने वाला था। यदि हम उनकी पूजा करने पर जमे न रहते, तो वह अपने तर्कों और सबूतों के साथ हमें उससे दूर कर देता। तथा जब वे अपनी क़ब्रों में और क़ियामत के दिन अज़ाब देखेंगे, तो जान लेंगे कि कौन सबसे अधिक रास्ते से भटका हुआ था? क्या वे लोग का अथवा रसूल? तथा यह भी जान लेंगे कि उनमें से कौन सबसे ज़्यादा गुमराह था।