وَلَقَدۡ أَتَوۡاْ عَلَى ٱلۡقَرۡيَةِ ٱلَّتِيٓ أُمۡطِرَتۡ مَطَرَ ٱلسَّوۡءِۚ أَفَلَمۡ يَكُونُواْ يَرَوۡنَهَاۚ بَلۡ كَانُواْ لَا يَرۡجُونَ نُشُورٗا ٤٠
और निश्चय ही ये लोग21 उस बस्ती22 पर आ चुके हैं, जिसपर बुरी वर्षा की गई। तो क्या ये लोग उसे देखा नहीं करते थे? बल्कि ये लोग पुनः जीवित करके उठाए जाने की आशा नहीं रखते थे।
फ़ुटनोट
21 अर्थात मक्का के मुश्रिक।
22 अर्थात लूत जाति की बस्ती पर, जिसका नाम "सदूम" था, जिसपर पत्थरों की वर्षा हुई। फिर भी शिक्षा ग्रहण नहीं की।
तफ़सीर
(ऐ नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम!) आपके समुदाय के ये झुठलाने वाले लोग - शाम के देश की यात्रा के समय - लूत की जाति की बस्ती के पास से गुज़रते हैं, जिस पर, उसकी अभद्रता की सज़ा के रूप में पत्थरों की वर्षा हुई थी, ताकि वे शिक्षा ग्रहण करें। तो क्या उन्होंने इस बस्ती से आँखें मूंद लीं, इसलिए उन्होंने इसे नहीं देखा? नहीं, बल्कि वे मरने के बाद पुनः जीवित होकर उठने की आशा ही नहीं रखते थे जिसके बाद उनका हिसाब-किताब लिया जाएगा।