सूरह Al-Furqan, आयत 32

25:32

وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَوۡلَا نُزِّلَ عَلَيۡهِ ٱلۡقُرۡءَانُ جُمۡلَةٗ وَٰحِدَةٗۚ كَذَٰلِكَ لِنُثَبِّتَ بِهِۦ فُؤَادَكَۖ وَرَتَّلۡنَٰهُ تَرۡتِيلٗا ٣٢

तथा कुफ़्र करने वालों ने कहा : यह क़ुरआन उसपर एक ही बार18 क्यों नहीं उतार दिया गया? इसी प्रकार (हमने उतारा) ताकि हम इसके साथ आपके दिल को मज़बूत करें और हमने इसे ख़ूब ठहर-ठहर कर पढ़कर सुनाया है।

फ़ुटनोट

18 अर्थात तौरात तथा इंजील के समान एक ही बार क्यों नहीं उतारा गया, आगामी आयतों में इसका कारण बताया जा रहा है कि क़ुरआन 23 वर्ष में क्रमशः आवश्यकतानुसार क्यों उतारा गया।

तफ़सीर

और अल्लाह का इनकार करने वालों ने कहा : यह क़ुरआन रसूल पर एक ही बार में क्यों नहीं उतार दिया गया? इस तरह थोड़ा-थोड़ा करके क्यों उतारा गया? (अल्लाह कहता है :) हमने क़ुरआन को ऐसे ही थोड़ा-थोड़ा करके इसलिए उतारा, ताकि (ऐ रसूल!) हम समय-समय पर इसे उतारकर आपके दिल को दृढ़ता प्रदान करें। तथा हमने इसे थोड़ा-थोड़ा इसलिए भी उतारा, ताकि इसे समझना और याद करना आसान हो जाए।