सूरह Al-Fath, आयत 27

48:27

لَّقَدۡ صَدَقَ ٱللَّهُ رَسُولَهُ ٱلرُّءۡيَا بِٱلۡحَقِّۖ لَتَدۡخُلُنَّ ٱلۡمَسۡجِدَ ٱلۡحَرَامَ إِن شَآءَ ٱللَّهُ ءَامِنِينَ مُحَلِّقِينَ رُءُوسَكُمۡ وَمُقَصِّرِينَ لَا تَخَافُونَۖ فَعَلِمَ مَا لَمۡ تَعۡلَمُواْ فَجَعَلَ مِن دُونِ ذَٰلِكَ فَتۡحٗا قَرِيبًا ٢٧

निःसंदेह अल्लाह ने अपने रसूल को हक़ के साथ सच्चा सपना दिखाया कि यदि अल्लाह ने चाहा तो तुम अवश्य मस्जिदे-ह़राम में प्रवेश करोगे, सुरक्षित होकर, अपने सिर मुँडाते तथा बाल कतरवाते हुए, तुम्हें किसी प्रकार का भय नहीं होगा।15 तो उसने वह बात जान ली जो तुमने नहीं जानी। इसिलए उससे पहले एक निकट विजय16 रख दी।

फ़ुटनोट

15 अर्थात "उम्रा" करते हुए जिसमें सिर के बाल मुँडाए या कटाए जाते हैं। इसी प्रकार "ह़ज्ज" में भी मुँडाए या कटाए जाते हैं।

16 इससे अभिप्राय ख़ैबर की विजय है, जो ह़ुदैबिया से वापसी के पश्चात् कुछ दिनों के बाद हुई। और दूसरे वर्ष संधि के अनुसार आपने अपने अनुयायियों के साथ उम्रा किया और आपका सपना अल्लाह ने साकार कर दिया।

तफ़सीर

निश्चय अल्लाह ने अपने रसूल के सत्य के साथ सच्चा स्वप्न दिखाया, जब उसने आपको उसे आपके सपने में दिखाया और आपने अपने साथियों को उसकी सूचना दी। जो कि यह था कि आप और आपके साथी अपने दुश्मनों से सुरक्षित अल्लाह के सम्मानित घर में दाखिल होंगे। उनमें से कुछ अपने सिर मुँडवाने वाले होंगे और कुछ बाल कटाने वाले, यह उम्रा के अनुष्ठान के अंत का सूचक होगा।अल्लाह को (ऐ मोमिनो!) तुम्हारे हित की उन बातों का ज्ञान है, जो तुम नहीं जानते, अतः उस वर्ष मक्का में प्रवेश के द्वारा सपने की पूर्ति से पहले उसने एक निकट विजय रख दी। और यह अल्लाह की बनाई हुई हुदैबियह की संधि है तथा उसके बाद हुदैबियह में शामिल मोमिनों के हाथों पर घटित होने वाली ख़ैबर की विजय है।