أَيَوَدُّ أَحَدُكُمۡ أَن تَكُونَ لَهُۥ جَنَّةٞ مِّن نَّخِيلٖ وَأَعۡنَابٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ لَهُۥ فِيهَا مِن كُلِّ ٱلثَّمَرَٰتِ وَأَصَابَهُ ٱلۡكِبَرُ وَلَهُۥ ذُرِّيَّةٞ ضُعَفَآءُ فَأَصَابَهَآ إِعۡصَارٞ فِيهِ نَارٞ فَٱحۡتَرَقَتۡۗ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمُ ٱلۡأٓيَٰتِ لَعَلَّكُمۡ تَتَفَكَّرُونَ ٢٦٦
क्या तुममें से कोई चाहेगा कि उसके पास खजूरों तथा अँगूरों का एक बाग़ हो, जिसके नीचे से नहरें बहती हों, उसमें उसके लिए प्रत्येक प्रकार के कुछ न कुछ फल हों और उसे बुढ़ापा आ जाए और उसके कमज़ोर बच्चे हों, फिर उस (बाग़) पर एक बगूला आ पहुँचे जिसमें एक आग हो, तो वह जल के राख हो जाए।178 इसी तरह अल्लाह तुम्हारे लिए निशानियाँ उजागर करता है, ताकि तुम सोच-विचार करो।
फ़ुटनोट
178 अर्थात यही दशा प्रलय के दिन काफ़िर की होगी। उसके पास फल पाने के लिए कोई कर्म नहीं होगा। और न कर्म करने का अवसर होगा। तथा जैसे उसके निर्बल बच्चे उसके काम नहीं आ सके, उसी प्रकार उसका दिखावे का दान भी काम नहीं आएगा, वह अपनी आवश्यकता के समय अपने कर्मों के फल से वंचित कर दिया जाएगा। जैसे इस व्यक्ति ने अपने बुढ़ापे तथा बच्चों की निर्बलता के समय अपना बाग़ खो दिया।
तफ़सीर
क्या तुममें से किसी को पसंद है कि उसके पास खजूरों और अँगूरों का एक बाग़ हो, जिसके बीच से मीठा पानी बहता हो। उस बाग़ में उसके लिए प्रत्येक प्रकार के अच्छे फल हों। उस बाग़ के मालिक को बुढ़ापा आ पहुँचे और वह इतना बूढ़ा हो गया हो कि काम करने और कमाने में असमर्थ हो, तथा उसके कमज़ोर छोटे-छोटे बच्चे हों, जो काम न कर सकते हों। फिर उस बाग़ पर एक आँधी चले, जिसमें एक तेज़ आग हो और सारा बाग़ जलकर खाक हो जाए। हालाँकि अपने बुढ़ापे और अपने बच्चों की कमज़ोरी के कारण उसे इसकी सख़्त ज़रूरत थी?! अतः लोगों को दिखाने के लिए अपना धन खर्च करने वाले की स्थिति इसी आदमी की तरह है; वह क़ियामत के दिन अल्लाह के पास बिना नेकियों के आएगा, एक ऐसे समय में जब उसे उनकी सबसे अधिक आवश्यकता होगी। इसी प्रकार अल्लाह तुम्हारे लिए वे चीज़ें खोल-खोलकर बयान करती है, जो दुनिया और आख़िरत में तुम्हें लाभ पहुँचाने वाली हैं, ताकि तुम उनपर चिंतन करो।