فِي ٱلدُّنۡيَا وَٱلۡأٓخِرَةِۗ وَيَسۡـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلۡيَتَٰمَىٰۖ قُلۡ إِصۡلَاحٞ لَّهُمۡ خَيۡرٞۖ وَإِن تُخَالِطُوهُمۡ فَإِخۡوَٰنُكُمۡۚ وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ ٱلۡمُفۡسِدَ مِنَ ٱلۡمُصۡلِحِۚ وَلَوۡ شَآءَ ٱللَّهُ لَأَعۡنَتَكُمۡۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٞ ٢٢٠
दुनिया और आख़िरत के बारे में। और वे आपसे अनाथों के विषय में पूछते हैं। (उनसे) कह दीजिए उनके लिए सुधार करते रहना बेहतर है। यदि तुम उन्हें अपने साथ मिलाकर रखो, तो वे तुम्हारे भाई हैं और अल्लाह बिगाड़ने वाले को सुधारने वाले से जानता है। और यदि अल्लाह चाहता, तो तुम्हें अवश्य कष्ट139 में डाल देता। निःसंदेह अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।
फ़ुटनोट
139 उनका खाना-पीना अलग करने का आदेश दे कर।
तफ़सीर
यह (उक्त विधान) इसलिए निर्धारित किया गया है ताकि तुम सोच-विचार करो कि दुनिया एवं आख़िरत में कौन-सी चीज़ तुम्हारे लिए लाभदायक है। तथा (ऐ नबी!) आपके साथी आपसे अनाथों के अभिभावक बनने के बारे में पूछते हैं कि : वे उनके साथ कैसा व्यवहार करें? क्या वे अनाथों के धन को ख़र्च, खाने-पीने और रहने-सहने में अपने धन के साथ मिला लें? आप उन्हें जवाब देते हुए कह दीजिए : यदि तुम बिना मुआवज़े के या उनके धन को अपने धन में मिलाए बिना उनके धन के सुधार के लिए काम करो, तो तुम्हारे लिए अल्लाह के निकट सबसे अच्छा और अधिक अज्र व सवाब वाला है, तथा यह उनके लिए उनके धन में उत्तम है; क्योंकि इसमें उनके धन का संरक्षण है। और यदि तुम उनके धन को अपने धन के साथ मिलाकर खाने-पीने और आवास आदि में उनके साथ साझा कर लो; तो इसमें कोई आपत्ति की बात नहीं है। क्योंकि वे तुम्हारे धार्मिक भाई हैं और भाई एक-दूसरे की मदद करते हैं और एक-दूसरे के मामलों की देख-भाल करते हैं। और अल्लाह खूब जानता है कि कौन अभिभावक अनाथों के धन को अपने साथ मिलाकर उसमें सुधार चाहता है और कौन बिगाड़ चाहता है। यदि अल्लाह यतीमों के बारे में तुम्हें परेशानी में डालना चाहता, तो वह तुम्हें अवश्य परेशानी में डाल देता। लेकिन अल्लाह ने तुम्हारे लिए उनके साथ व्यवहार का रास्ता आसान कर दिया; क्योंकि उसकी शरीयत आसानी पर आधारित है। निःसंदेह अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली है, उसे कोई चीज़ परास्त नहीं कर सकती। वह अपनी रचना, प्रबंधन और विधान में हिकमत वाला है।