وَمَثَلُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ كَمَثَلِ ٱلَّذِي يَنۡعِقُ بِمَا لَا يَسۡمَعُ إِلَّا دُعَآءٗ وَنِدَآءٗۚ صُمُّۢ بُكۡمٌ عُمۡيٞ فَهُمۡ لَا يَعۡقِلُونَ ١٧١
उन लोगों का उदाहरण जिन्होंने कुफ़्र किया, उस व्यक्ति के उदाहरण जैसा है, जो उन जानवरों को पुकारता है, जो पुकार और आवाज़ के सिवा कुछ91 नहीं सुनते। वे बहरे हैं, गूँगे हैं, अंधे हैं, इसलिए वे नहीं समझते।
फ़ुटनोट
91 अर्थात ध्वनि सुनता है परंतु बात का अर्ध नहीं समझता।
तफ़सीर
अपने बाप-दादा का अनुसरण करने में काफ़िरों का उदाहरण उस चरवाहे के समान है, जो अपने पशुओं को आवाज़ देता है, तो वे (पशु) उसकी आवाज़ तो सुनते हैं, परंतु उसकी बात नहीं समझते हैं। इसी तरह, वे (काफ़िर) सत्य को इस प्रकार सुनने से बहरे हैं कि उसका लाभ उठा सकें, गूंगे हैं, उनकी ज़बानें सच बोलने से मूक हैं, तथा सत्य को देखने से अंधे हैं। इसलिए वे उस मार्गदर्शन को नहीं समझते हैं जिसकी ओर आप उन्हें बुला रहे हैं।