بَلَىٰۚ مَنۡ أَسۡلَمَ وَجۡهَهُۥ لِلَّهِ وَهُوَ مُحۡسِنٞ فَلَهُۥٓ أَجۡرُهُۥ عِندَ رَبِّهِۦ وَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمۡ وَلَا هُمۡ يَحۡزَنُونَ ١١٢
क्यों नहीं,54 जिसने अपना चेहरा अल्लाह के अधीन कर दिया और वह अच्छा कार्या करने वाला हो, तो उसके लिए उसका बदला उसके पालनहार के पास है और न उनपर कोई भय है और न वे शोकाकुल होंगे।
फ़ुटनोट
54 स्वर्ग में प्रवेश का साधारण नियम अर्थात मुक्ति एकेश्वरवाद तथा सत्कर्म पर आधारित है, किसी जाति अथवा गिरोह पर नहीं।
तफ़सीर
केवल वही व्यक्ति जन्नत में प्रवेश करेगा, जो निष्ठा के साथ अपने आप को अल्लाह के अधीन कर दे, तथा वह - अपनी निष्ठा के साथ-साथ - रसूल के लाए हुए तरीक़े का अनुसरण करके अच्छी तरह से इबादत करने वाला है। चुनाँचे ऐसा ही व्यक्ति जन्नत में प्रवेश करेगा, चाहे वह किसी भी संप्रदाय से हो। तथा उसके लिए उसका बदला उसके पालनहार के पास है। आख़िरत में उन्हें न कोई भय होगा और न ही वे दुनिया में न मिलने वाली वस्तुओं पर दुखी होंगे। ज्ञात हो कि ये ऐसी विशेषताएँ हैं, जो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के आने के बाद, केवल मोमिनों ही में पाई जा सकती हैं।