۞ مَا نَنسَخۡ مِنۡ ءَايَةٍ أَوۡ نُنسِهَا نَأۡتِ بِخَيۡرٖ مِّنۡهَآ أَوۡ مِثۡلِهَآۗ أَلَمۡ تَعۡلَمۡ أَنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٌ ١٠٦
हम जो भी आयत मन्सूख़ (निरस्त) करते हैं, या उसे भुला देते हैं, तो उससे बेहतर, या उसके समान (और) ले आते हैं। क्या तुमने नहीं जाना कि निःसंदेह अल्लाह हर चीज़52 पर सर्वशक्तिमान है।
फ़ुटनोट
52 इस आयत में यहूदियों के तौरात के आदेशों के निरस्त किए जाने तथा ईसा अलैहिस्सलाम और मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नुबुव्वत के इनकार का खंडन किया गया है।
तफ़सीर
अल्लाह तआला बयान कर रहा है कि जब वह क़ुरआन की किसी आयत के ह़ुक्म को उठा देता (समाप्त कर देता) है, या उसके शब्द को ख़त्म कर देता है और लोग उसे भूल जाते हैं, तो अल्लाह उसके स्थान पर ऐसी आयत ले आता है, जो तत्काल और भविष्य में उससे अधिक फायदेमंद होती है, अथवा उसके समान होती है, और यह सब कुछ अल्लाह के ज्ञान और उसकी ह़िकमत के मुताबिक़ होता है। और - ऐ नबी! - आप जानते हैं कि अल्लाह हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है। चुनाँचे वह जो चाहता है, करता है, और जो चाहता है, आदेश देता है।