सूरह Al-Baqarah, आयत 100

2:100

أَوَكُلَّمَا عَٰهَدُواْ عَهۡدٗا نَّبَذَهُۥ فَرِيقٞ مِّنۡهُمۚ بَلۡ أَكۡثَرُهُمۡ لَا يُؤۡمِنُونَ ١٠٠

और क्या जब कभी उन्होंने कोई वचन दिया, तो उनके एक समूह ने उसे तोड़ दिया? बल्कि उनमें अधिकतर ईमान नहीं रखते।

तफ़सीर

यहूदियों की बुरी स्थिति में से एक यह है कि जब भी उन्होंने अपने आपसे कोई वचन लिया - जिसमें तौरात में मौजूद मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नुबुव्वत पर ईमान लाना भी शामिल है - तो उनके एक गिरोह ने उसे तोड़ दिया। बल्कि तथ्य यह है कि इन यहूदियों में से अधिकांश लोग उसपर सही मायने में ईमान नहीं रखते, जो अल्लाह ने अवतरित किया है; क्योंकि ईमान वचन को पूरा करने की प्रेरणा देता है।