يَٰبَنِيٓ ءَادَمَ لَا يَفۡتِنَنَّكُمُ ٱلشَّيۡطَٰنُ كَمَآ أَخۡرَجَ أَبَوَيۡكُم مِّنَ ٱلۡجَنَّةِ يَنزِعُ عَنۡهُمَا لِبَاسَهُمَا لِيُرِيَهُمَا سَوۡءَٰتِهِمَآۚ إِنَّهُۥ يَرَىٰكُمۡ هُوَ وَقَبِيلُهُۥ مِنۡ حَيۡثُ لَا تَرَوۡنَهُمۡۗ إِنَّا جَعَلۡنَا ٱلشَّيَٰطِينَ أَوۡلِيَآءَ لِلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ ٢٧
ऐ आदम की संतान! ऐसा न हो कि शैतान तुम्हें लुभाए, जैसे उसने तुम्हारे माता-पिता को जन्नत से निकाल दिया; वह दोनों के वस्त्र उतारता था, ताकि दोनों को उनके गुप्तांग दिखाए। निःसंदेह वह तथा उसकी जाति, तुम्हें वहाँ से देखते हैं, जहाँ से तुम उन्हें नहीं देखते। निःसंदेह हमने शैतानों को उन लोगों का मित्र बनाया है, जो ईमान नहीं रखते।
तफ़सीर
ऐ आदम की संतान! शैतान तुम्हारे लिए, गुप्त अंगों को ढकने के लिए संवेदी वस्त्र को त्यागने या तक़्वा (धर्मपरायणता) की पोशाक को त्यागने की अवज्ञा को सुशोभित करके तुम्हें हरगिज़ धोखे में न डाले। क्योंकि उसने तुम्हारे माता-पिता को पेड़ से खाने को सुसज्जित करके धोखा दिया था, यहाँ तक कि उसका परिणाम यह हुआ कि उसने उन्हें जन्नत से निकाल दिया और उनके लिए उनके गुप्तांग प्रकट हो गए। निःसंदेह शैतान और उसका वंश तुम्हें देखते हैं, लेकिन तुम उन्हें नहीं देखते। अतः तुम्हें उससे और उसके वंश से सावधान रहना होगा। हमने शैतानों को ऐसे लोगों का मित्र बना दिया है, जो अल्लाह पर ईमान नहीं रखते। रहे ईमान वाले, जो अच्छे कर्म करते हैं, तो उनपर उन (शैतानों) का कोई रास्ता नहीं है।