सूरह Al-A'raf, आयत 173

7:173

أَوۡ تَقُولُوٓاْ إِنَّمَآ أَشۡرَكَ ءَابَآؤُنَا مِن قَبۡلُ وَكُنَّا ذُرِّيَّةٗ مِّنۢ بَعۡدِهِمۡۖ أَفَتُهۡلِكُنَا بِمَا فَعَلَ ٱلۡمُبۡطِلُونَ ١٧٣

अथवा यह कहो कि शिर्क तो हमसे पहले हमारे बाप-दादा ही ने किया था और हम तो उनके बाद उनकी संतान थे। तो क्या तू गुमराहों के कर्म के कारण हमें विनष्ट करता है?65

फ़ुटनोट

65 आयत का भावार्थ यह है कि अल्लाह के अस्तित्व तथा एकेश्वर्वाद की आस्था सभी मानव का स्वभाविक धर्म है। कोई यह नहीं कह सकता कि मैं अपने पूर्वजों की गुमराही से गुमराह हो गया। यह स्वभाविक आंतरिक आवाज़ है जो कभी दब नहीं सकती।

तफ़सीर

अथवा तुम यह तर्क प्रस्तुत करो कि दरअसल तुम्हारे बाप-दादा ही ने वचन तोड़ा और अल्लाह के साथ शिर्क किया था। और तुम उनकी देखा-देखी शिर्क की राह पर चल पड़े थे। इसलिए तुम यह कहो : तो क्या (ऐ हमारे पालनहार!) तू हमारी पकड़ उसके कारण करके हमें यातना देगा, जो हमारे उन पूर्वजों ने किया था जिन्होंने अल्लाह के साथ शिर्क करके अपने अच्छे कर्मों को नष्ट कर लिया था? अतः हम दोषी नहीं हैं, क्योंकि हमें कुछ पता नहीं था और हमने केवल अपने बाप-दादा की देखा-देखी ऐसा किया था।