فَأَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِمُ ٱلطُّوفَانَ وَٱلۡجَرَادَ وَٱلۡقُمَّلَ وَٱلضَّفَادِعَ وَٱلدَّمَ ءَايَٰتٖ مُّفَصَّلَٰتٖ فَٱسۡتَكۡبَرُواْ وَكَانُواْ قَوۡمٗا مُّجۡرِمِينَ ١٣٣
फिर हमने उनपर तूफ़ान भेजा और टिड्डियाँ और जुएँ और मेंढक और रक्त, जो अलग-अलग निशानियाँ थीं। फिर भी उन्होंने अभिमान किया और वे अपराधी लोग थे।
तफ़सीर
अंततः हमने उनके झुठलाने और हठ पर सज़ा के रूप में उनपर बहुत सारा पानी भेजा, जिसने उनकी फसलों और फलों को डुबो दिया। और हमने उन पर टिड्डियाँ भेजीं, जो उनकी फसलें खा गईं। और हमने उनपर जुएँ भेजीं, जो खेतियों को लग जाती हैं या इनसान के बाल में रहकर उसे कष्ट देती हैं, और हमने उन पर मेंढक भेजे, जो उनके बर्तनों में भर गए, उनके खाने-पीने की चीज़ों को खराब कर दिए और उनकी नींदें उड़ा दीं। और हमने उनपर रक्त भेजा, जिससे उनके कुएँ और उनकी नहरें रक्तमय हो गईं। हमने ये सब अलग-अलग और स्पष्ट निशानियाँ भेजीं, जो एक के बाद एक आती रहीं। परंतु ये सारी सज़ाएँ आने के बावजूद वे अल्लाह पर ईमान लाने और मूसा अलैहिस्सलाम के लाए हुए संदेश को मानने से अभिमान करते रहे। और वे ऐसे लोग थे जो पाप किया करते थे, वे न असत्य दूर रहते थे और न सत्य की राह पकड़ते थे।