وَمَآ أَنتُم بِمُعۡجِزِينَ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَا فِي ٱلسَّمَآءِۖ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ مِن وَلِيّٖ وَلَا نَصِيرٖ ٢٢
और न तुम किसी भी तरह धरती में विवश करने वाले हो और न आकाश में, और न अल्लाह के अलावा तुम्हारा कोई दोस्त है और न कोई मददगार।
तफ़सीर
और तुम धरती या आकाश में कहीं भी, न अपने रब से बचकर निकल सकते हो, और न ही उसकी यातना से भागने में सफल हो सकते हो। तथा अल्लाह के सिवा तुम्हारा कोई संरक्षक नहीं, जो तुम्हारे मामले को संभाल सके, और न अल्लाह के सिवा तुम्हारा कोई सहायक है, जो तुमसे उसकी यातना को दूर कर सके।