فَأَنجَيۡنَٰهُ وَأَصۡحَٰبَ ٱلسَّفِينَةِ وَجَعَلۡنَٰهَآ ءَايَةٗ لِّلۡعَٰلَمِينَ ١٥
फिर हमने उसे और नाव वालों को बचा लिया और उस (नाव) को सारे संसार के लिए एक निशानी बना दिया।
तफ़सीर
फिर हमने नूह तथा नाव में उनके साथ मौजूद ईमान वालों को डूबने से बचा लिया तथा नाव को लोगों के लिए इबरत की एक निशानी बना दिया, जिससे वे इबरत हासिल कर सकें।