وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مِنۢ بَعۡدُ وَهَاجَرُواْ وَجَٰهَدُواْ مَعَكُمۡ فَأُوْلَٰٓئِكَ مِنكُمۡۚ وَأُوْلُواْ ٱلۡأَرۡحَامِ بَعۡضُهُمۡ أَوۡلَىٰ بِبَعۡضٖ فِي كِتَٰبِ ٱللَّهِۚ إِنَّ ٱللَّهَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمُۢ ٧٥
तथा जो लोग बाद में ईमान लाए और हिजरत की और तुम्हारे साथ मिलकर जिहाद किया, तो वे तुम ही में से हैं। और अल्लाह की किताब में रिश्तेदार एक-दूसरे के अधिक हक़दार34 हैं। निःसंदेह अल्लाह प्रत्येक चीज़ को भली-भाँति जानने वाला है।
फ़ुटनोट
34 अर्थात मीरास में उनको प्राथमिकता प्राप्त है।
तफ़सीर
जो लोग, सबसे पहले ईमान लाने वाले मुहाजिरों और अनसारियों के बाद ईमान लाए, तथा उन्होंने कुफ़्र के देश से इस्लाम के देश की ओर हिजरत की और अल्लाह के मार्ग में जिहाद किया, ताकि अल्लाह की बात सर्वोच्च हो और काफ़िरों की बात नीची, तो वे लोग (ऐ मोमिनो!) तुम ही में से हैं। उनके लिए वही अधिकार हैं, जो तुम्हारे लिए हैं तथा उनके वही कर्तव्य (और दायित्व) हैं, जो तुम्हारे हैं। तथा अल्लाह के निर्णय में रिश्तेदारी के लोग, आपस में एक-दूसरे के वारिस होने के, पहले से मौजूद ईमान और हिजरत के आधार पर वारिस होने से अधिक हक़दार हैं। निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ को जानने वाला है। उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है। अतः वह जानता है कि उसके बंदों के हित में क्या है, इसलिए वह उसे उनके लिए धर्मसंगत कर देता है।