وَأَنَّ هَٰذَا صِرَٰطِي مُسۡتَقِيمٗا فَٱتَّبِعُوهُۖ وَلَا تَتَّبِعُواْ ٱلسُّبُلَ فَتَفَرَّقَ بِكُمۡ عَن سَبِيلِهِۦۚ ذَٰلِكُمۡ وَصَّىٰكُم بِهِۦ لَعَلَّكُمۡ تَتَّقُونَ ١٥٣
तथा यह कि यही मेरा सीधा मार्ग102 है। सो तुम उसी पर चलो। और दूसरी राहों पर न चलो, अन्यथा वे तुम्हें उसकी राह से हटाकर इधर-उधर कर देंगे। यही वह बात है, जिसकी ताकीद उसने तुम्हें की है, ताकि तुम उसके आज्ञाकारी रहो।
फ़ुटनोट
102 नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक लकीर बनाई, और कहा : यह अल्लाह की राह है। फिर दाएँ-बाएँ कई लकीरें खींचीं और कहा : इन पर शैतान है, जो इनकी ओर बुलाता है और यही आयत पढ़ी। (मुसनद अह़मद : 431)
तफ़सीर
तथा उसने तुम्हारे लिए गुमराही के रास्तों पर चलना हराम ठहराया है। बल्कि, तुम्हें अल्लाह के सीधे मार्ग का अनुसरण करना चाहिए, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है। गुमराही के रास्ते तुम्हें अलगाव और सत्य के मार्ग से दूरी की ओर ले जाते हैं। अल्लाह के सीधे मार्ग पर चलना ही है वह तथ्य है जिसकी अल्लाह ने तुम्हें ताकीद की है; ताकि तुम अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके एवं उसकी मना की हुई बातों से दूर रहकर, डरो।