सूरह Al-An'am, आयत 105

6:105

وَكَذَٰلِكَ نُصَرِّفُ ٱلۡأٓيَٰتِ وَلِيَقُولُواْ دَرَسۡتَ وَلِنُبَيِّنَهُۥ لِقَوۡمٖ يَعۡلَمُونَ ١٠٥

और इसी प्रकार, हम आयतों को विविध ढंग से बयान करते हैं और ताकि वे (मुश्रिक) कहें : आपने पढ़ा67 है, और ताकि हम उसे उन लोगों के लिए उजागर कर दें, जो ज्ञान रखते हैं।

फ़ुटनोट

67 अर्थात काफ़िर यह कहें कि आपने यह अह्ले किताब से सीख लिया है और इसे अस्वीकार कर दें। (इब्ने कसीर)

तफ़सीर

जिस तरह हमने अल्लाह की शक्ति के प्रमाणों और दलीलों को विविध तरीक़े से बयान किया है, उसी तरह हम वादे, धमकी तथा उपदेश से संबंधित आयतों में विविधता लाते हैं। तथा मुश्रिक लोग कहेंगे कि यह कोई वह़्य नहीं हैं, बल्कि तुमने इसे अपने से पहले किताब वाले लोगों से पढ़ा है। और ताकि हम मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत में से ईमान वालों के लिए इन आयतों में विविधता लाकर लोगों के लिए सत्य को स्पष्ट कर दें। क्योंकि वही लोग हैं जो सत्य को स्वीकार करते हैं और उसका पालन करते हैं।