فَجَعَلَهُۥ غُثَآءً أَحۡوَىٰ ٥
फिर उसे (सुखाकर) काले रंग का कूड़ा बना दिया।2
फ़ुटनोट
2 (4-5) इन आयतों में बताया गया है कि प्रत्येक कार्य अनुक्रम से धीरे-धीरे होते हैं। धरती के पौधे धीरे-धीरे गुंजान और हरे-भरे होते हैं। ऐसे ही मानवीय योग्यताएँ भी धीरे-धीरे पूरी होती हैं।
तफ़सीर
फिर उसे काले रंग की सूखी घास बना दी, जबकि वह पहले हरी ताज़ी (घास) थी।