सूरह Al-A'la, आयत 13

87:13

ثُمَّ لَا يَمُوتُ فِيهَا وَلَا يَحۡيَىٰ ١٣

फिर वह उसमें न मरेगा, न जिएगा।4

फ़ुटनोट

4 (9-13) इनमें बताया गया है कि आपको मात्र इसका प्रचार-प्रसार करना है। और इसकी सरल राह यह है कि जो सुने और मानने के लिए तैयार हो, उसे शिक्षा दी जाए। किसी के पीछे पड़ने की आवश्यकता नहीं है। जो हत्भागे हैं, वही नहीं सुनेंगे और नरक की यातना के रूप में अपना दुष्परिणाम देखेंगे।

तफ़सीर

फिर वह हमेशा के लिए जहन्नम में रहेगा, न तो उसमें मरेगा कि उस यातना से आराम पा जाए, जो वह झेल रहा होगा, और न ही वह एक अच्छा और सम्मानजनक जीवन जिएगा।